वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सर्वश्रेष्ठ तकनीकी का इस्तेमाल करे सरकार
दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई अन्य हिस्सों में बढ़ रहे प्रदूषण के चलते सुप्रीम कोर्ट ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी का इस्तेमाल करने को कहा है। बढ़ रहे वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब सरकार स्माॅग टावर का उपयोग करेगी। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए एन एस नादकर्णी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अधिकारी और विशेषज्ञ इसकी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं इस विचार विमर्श में शामिल आईआईटी मुंबई के एक प्रोफेसर ने अदालत को इसकी तकनीकी और अन्य पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया।
बढ़ रहे वायु प्रदूषण पर कोई नियंत्रण न देख शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर सहित चार राज्यों के मुख्य सचिवों को सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीखे सवाल करते हुए पूछा कि यदि पराली जलनी कम हुई फिर भी प्रदूषण कम क्यों नहीं हो रहा है? साथ ही दिल्ली सरकार से कोर्ट ने पूछा कि दुपहिया और तिपहिया वाहनों को ऑड इवेन स्कीम से छूट क्यों दी गई है? कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या इस स्कीम से राजधानी को कोई लाभ हुआ है? सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने 29 नवंबर को मुख्य सचिवों को कोर्ट में पेश होने का कहा है। साथ ही अनुपालन रिपोर्ट भी देने को कहा है। सभी मुख्य सचिवों को 25 नवंबर तक हलफनामा दायर करने को कहा है।
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सरकार की ओर से स्माॅग टावर की जानकारी देने पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आप दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी का इस्तेमाल क्यों नहीं करते हैं? आप उच्च श्रेणी के उपकरणों का इस्तेमाल कीजिए। वहीं दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण से निपट पाने में विफल रहने के लिए कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। और पूछा है कि इस बेहद गंभीर आपात स्थिति से निपटने के लिए मोदी सरकार ने कौन से उपाय किए हैं? कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि समन्वित प्रयासों के जरिए इस समस्या का समाधान किया जा सकता है क्योंकि अलग-अलग पार्टियों की कई राज्य सरकारें इसके समाधान में शामिल हैं।


